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श्री देवी भागवत सुनने वाला कभी नरक में नहीं जा सकता है। = श्री दिव्य मोरारी बापू

श्री देवी भागवत सुनने वाला कभी नरक में नहीं जा सकता है। = श्री दिव्य मोरारी बापू

गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) स्थानीय सार्वजनिक धर्मशाला में चल रहे  श्रीदिव्य चातुर्मास सत्संग 
महामहोत्सव में श्रीमद्देवीभागवत महापुराण कथा में कथा व्यास-श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री दिव्य मोरारी बापू ने देवी भागवत सुनने का फल के बारे में कहा कि
मां शक्ति है और शक्ति से ही सारा संसार संचालित होता है। महर्षि वेदव्यास ने श्रीमद् देवी भागवत को अपने पास छुपा कर रखा था। जब जनमेजय ज्यादा परेशान हुए कि पिता की सद्गति कैसे हो? तब वेदव्यास जी ने कहा- जनमेजय! मैं तुम्हें देवी भागवत की कथा सुना देता हूं। यह नौ दिन में पूरी होती है। जो देवी भागवत की कथा सुनते हैं, उनके अंदर मां का प्रवेश स्वत: हो जाता है।' 'देवी भागवत,सुनने वाला कभी नरक नहीं जा सकता। जिस दिन देवी भागवत-कथा संपूर्ण होगी, तुम्हारे पिता सीधे बैकुंठ जाते नजर आएंगे और देवता पुष्प वर्षाकर उनका स्वागत करेंगे।देवी भागवत में स्पष्ट लिखा है कि ऐसा ही हुआ। अंतिम दिन जब देवी भागवत कथा पूर्ण हुई और ब्राह्मणों को दक्षिण तथा भोजन दिया जा रहा था कि ऋषि नारद आ गये। स्वागत सत्कार करके जनमेजय ने पूछा, 'कैसे पधारे? नारद जी ने जवाब दिया कि 'एक शुभ समाचार लेकर आया हूं' जनमेजय ने पूछा क्या समाचार है? नारद जी ने बताया,' तुम्हारे पिता विमान पर बैठकर बैकुंठ जा रहे थे । रास्ते में मुझसे मिलने पर उन्होंने निवेदन किया कि जनमेजय को सुना देना कि तुम हमारे लायक पुत्र हो। तुमने देवी भागवत की कथा सुनकर हमें बैकुंठ भेज दिया। हम बैकुंठ जा रहे हैं । जनमेजय को बता देना,ऋषिवर! ताकि उसकी पीड़ा शांत हो जाये। मैं तुम्हें यह सुनने आया हूं कि देवी भागवत, 
अंबायज्ञ का फल तुम्हारे पिता को मिल गया है और वे सीधे बैकुंठ जा रहे हैं।' जनमेजय की आंखों से प्रेम के आंसू निकल पड़े और नारद जी के चरणों में सिर रख दिया और धन्य धन्य हो गये। इस दौरान श्री दिव्य सत्संग चातुर्मास मंडल के व्यवस्थापक घनश्यामदास जी महाराज, गुलाबपुरा सत्संग मंडल अध्यक्ष अरविंद माहेश्वरी, एडवोकेट विजयप्रकाश शर्मा, सहित श्रद्धालु गण मौजूद थे।

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