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जब बार बार आप मंत्र जपेंगे, तब मंत्र का देवता कभी तो आपकी ओर ध्यान देंगे। = श्री दिव्य मोरारी बापू

जब बार बार आप मंत्र जपेंगे, तब मंत्र का देवता कभी तो आपकी ओर ध्यान देंगे। = श्री दिव्य मोरारी बापू

गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) स्थानीय सार्वजनिक धर्मशाला में चल रहे श्रीदिव्य चातुर्मास सत्संग 
महामहोत्सव में श्रीमद्देवीभागवत महापुराण 
ज्ञानयज्ञ कथा में कथा व्यास-श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री दिव्य मोरारी बापू ने बताया कि
देवी भागवत में बुद्धि बढ़ाने वाला एक मंत्र है, बहुत बढ़िया मंत्र है, और यह पहला ही मंत्र है।
"ऊँ सर्व चैतन्यरूपां तामाद्यां विद्यां च धीमहि, बुद्धिं यो नः प्रचोदयात्।"
देवी भागवत प्रथम स्कंद, प्रथम- अध्याय, प्रथम-मंत्र।

जो समग्र चेतनाओं की केंद्र-बिंदु हैं,जो आदि विद्या है, हम उनका ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को निर्मल बना दें और परमात्मा की ओर प्रेरित कर दें। जब बार-बार आप मंत्र जपेंगे, तब मंत्र का देवता कभी तो आपकी ओर ध्यान देगा। किसी गली में रामलाल नाम का व्यक्ति रह रहा है। ढूंढने वाला शक्ल नहीं पहचानता, लेकिन नाम जानता है। वह गली में आवाज लगता जा रहा है, अरे भैया रामलाल! रामलाल जी! नाम सुनते ही रामलाल उठेंगे, झांक कर देखेंगे, अरे! क्या बात है भाई? रामलाल को ढूंढ रहा हूं। वह कहेगा, मैं ही रामलाल हूं। देखो, सिर्फ नाम के आधार पर रामलाल ने अपना परिचय स्वयं दे दिया। इसी प्रकार आप भी भगवान को नहीं जानते, भगवान का नाम जानते हैं, सदा नाम जपते रहेंगे, तब कभी तो  आकर वह पूछेंगे कि क्या बात है? क्यों मेरा नाम ले रहे हो?
यह पुराणोक्त गायत्री मंत्र है। सात्विक जीवन बितायें और सात्विक भजन करें। नवार्ण मंत्र का जाप करें, पराम्बा का चिंतन करें, आपको बुद्धि मिलेगी, शक्ति मिलेगी, कोई शत्रु नहीं होगा और लक्ष्मी प्राप्त होगी। इस दौरान श्री दिव्य सत्संग व्यवस्थापक घनश्यामदास जी महाराज, सत्संग मंडल अरविंद सोमाणी, एडवोकेट विजय प्रकाश शर्मा, सहित सैकड़ों श्रद्धालु, भक्तगण मौजूद थे। 


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