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एक झूठ छिपाने के लिए मनुष्य को सौ झूठ बोलने पडते है= श्री दिव्य मोरारी बापू

एक झूठ छिपाने के लिए मनुष्य को सौ झूठ बोलने पडते है= श्री दिव्य मोरारी बापू

गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) स्थानीय सार्वजनिक धर्मशाला में चल रहे श्रीदिव्य चातुर्मास सत्संग 
महामहोत्सव पितृपक्ष के पावन अवसर पर पाक्षिक श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ कथा में कथा व्यास-श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री दिव्य मोरारी बापू  ने  श्रीमद्भागवत महापुराण में अहिंसा और सत्य के बारे में विस्तृत वर्णन किया। कथा के मोरारी बापू ने कहा कि
अहिंसा÷ किसी जीव को दुःख न देना, हत्या न करना, अहिंसा कहलाती है। महात्मा गांधी ने इन 12 यमों में से पहले दो, अहिंसा और सत्य को जीवन में उतारा तथा देश को स्वतंत्रता प्राप्त करवा कर राष्ट्रपिता का सम्मान अर्जित किया।अहिंसा जीवन की उपलब्धि है। अपनी ओर से प्राणी मात्र को अभय देना अहिंसा है। अभय दान बड़ा दान है।कथा में मोरारी बापू ने कहा कि
सत्य÷ सत्य ईश्वर का स्वरूप है। परमात्मा को सच्चिदानंद कहा गया है अर्थात् वह सत् , चित् और आनंद है। जब तक वाणी पर सत्य नहीं आता हृदय में प्रकाश नहीं होता। सत्य एक ही है। सत्य बोलने के अनेक लाभ है। सत्यवादी जहां समाज में सम्मान पाता है वह प्रभु को भी प्यारा होता है। वह ज्ञान, तप, साधना की राह पर सुगमता से चल सकता है। दूसरी ओर असत्यवादी घृणा और अपयश का पात्र बन जाता है। कहावत मशहूर है कि- एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं। फिर झूठ, झूठ ही रहता है और झूठ बोलने वाला भयभीत और शंकित रहता है। असत्य की इस प्रक्रिया में समय और सम्मान का विनाश होता है।कथा में इस दौरान श्री दिव्य चातुर्मास सत्संग मंडल के आयोजक घनश्यामदास जी महाराज, सत्संग मंडल अध्यक्ष अरविंद सोमाणी, एडवोकेट विजय प्रकाश शर्मा, सहित श्रद्धालुगण मौजूद थे।

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