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दिपावली पर्व श्री महालक्ष्मी जी का प्राकट्य उत्सव भी है। = श्री दिव्य मोरारी बापू

दिपावली पर्व श्री महालक्ष्मी जी का प्राकट्य उत्सव भी है। = श्री दिव्य मोरारी बापू

बिजयनगर (रामकिशन वैष्णव) श्री महामण्डलेश्वर श्री दिव्य मोरारी बापू ने दीपावली के पावन अवसर पर श्रीदिव्य घनश्याम धाम गोवर्धन में दीपावली के पावन पर्व पर विशेष सत्संग में बताया कि
भगवान श्री राम का अयोध्या आगमन पर उत्सव, दीपावली का उत्सव है। भगवान श्री राम अन्यायी राजा रावण की लंका पर विजय करके, पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या आगमन हुआ, उसी उपलक्ष में श्री राम भक्तों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया यह उत्सव मनाने से व्यक्ति के जीवन में भगवान श्री राम का भक्ति एवं उनके विचारों से सहमत होने का संकेत मिलता है। दिवाली का उत्सव मनाने से भगवान श्री सीताराम जी की प्रसन्नता, भगवान के भक्तों की प्रसन्नता एवं जीवन में श्री राम जी का आदर्श उपलब्ध होता है। इसलिए दिवाली का उत्सव हर्ष उल्लास के साथ अवश्य मानना चाहिए। दीपावली के दिन श्री राम दरबार का पूजन करना चाहिए, दीप जला करके खुशियां व्यक्त करना चाहिए। दीपावली का उत्सव मां लक्ष्मी के प्राकट्य का भी उत्सव है। श्रीमद् भागवत महापुराण के अष्टम्-स्कंध में कथा आती है कि- समुद्र मंथन के समय मां लक्ष्मी का प्राकट्य दीपावली के दिन ही हुआ। मां के प्राकट्य पर भक्तों ने मां लक्ष्मी की पूजा, श्रीलक्ष्मीनारायण भगवान की पूजा एवं दीप जलाकर उत्सव मनाया। मां ज्योति से बहुत प्रसन्न होती है। भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण,माता-महालक्ष्मी की प्रसन्नता एवं सुख-समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस दीपावली पर मां का पूजन, दीप जलाकर उत्सव अवश्य मानना चाहिए। कथा व्यास श्री दिव्य मोरारी बापू जी ने कहा कि
दीपावली के दिन मंत्र-जप, 
पूजा-पाठ, हरि-दर्शन एवं दान आदि सत्कर्म करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है। इसलिए दीपावली के दिन विशेष 
पूजा-पाठ, हरि-दर्शन, दान-पुण्य करना चाहिए। दीपावली के दिन मंत्र-जप,नाम-जप और पाठ की सिद्धि भी होती है। जो हम आप दैनिक मंत्र जप करते हैं, नाम-जप करते हैं अथवा पाठ करते हैं। उसको दीप प्रज्वलित करके संध्या काल में करने से उसे 
मंत्र-जप, हरि-कीर्तन, नाम-जप और पाठ की सिद्धि होती है। अतः अपना दैनिक मन्त्र-जप,  पाठ अथवा जो कुछ भी आप सिद्ध करना चाहते हैं, दीप प्रज्वलित करने के बाद अवश्य करें। इस दौरान श्री दिव्य सत्संग व्यवस्थापक व आयोजक श्री घनश्यामदास जी महाराज सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।

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